तेरा दर्द मेरे हाथों कि जद में ही है
खातिर उंगलियो को पत्थर से कुचल कर देखा
#गद्दार।
मेरे अंदर का शोर गूंजता है और लाता है जिसे बाहर, उस से लिखता हूँ मै जो, उसे नाम नही देता शेर, ग़ज़ल, नज्म अशआर का वो तो होते है बस बिखरें पन्नें मेरे
दर्द बहता ही रहा दिल में एक ज़माने से
जिंदगी बाज़ आई ना नस्तर चुभाने से
मिठाइयाँ लिए फिरते हो करीबियों की
कड़वाहटे ही बांटी है रिश्ते आजमाने से
उसकी हिफ़ाज़त को लड़ते फिरे गैरो से
वो भी खुश ही था कंही तुझे गिराने से
हर मौको पे पलटा फितरत से "गद्दार"
मौत आई थी मरहम लिए एक बहाने से
#gaddar