Tuesday, 12 January 2016

ख़्वाब इंतिखाब गद्दार

तन्हाई में रातों सा शबाब आता है
कैसे बंद आँखों में ख़्वाब आता है

मेरी बर्बादियों में जो शुमार रहा है
उन   निगाहों पे इंतिख़ाब आता है

आप समंदर ढूंढते हो डूबने खातिर
कि पानी दरिया में बेहिसाब आता है

उठ उठ आते है सौ सवाल तुम पर
"गद्दार" उन पर  एक जवाब आता है  #गद्दार 

Monday, 11 January 2016

पत्थर 6

सवाल  शीशे  से  जो   उठेंगे   तुम पर
जवाब में ख़ामोशियों के पत्थर उठाना #गद्दार

Sunday, 10 January 2016

पत्थर 5

सवाल वजूद का तो मेरे दरमियां था
आइना क्यूँ आइना देख कर हैरान था #गद्दार

पत्थर 4

टुटा जो आइना वो अपनी ही जिद पे था
  पत्थर तो मेरे हाथ का अब भी हैरान है #गद्दार

Sunday, 3 January 2016

इक रात गद्दार

 तुम्हें रात भर सोचकर देखा
 खुद को रात  जगाकर देखा

   सर्द हवा सी दस्तक पर  यूँ
दिल दरवाज़ा खोलकर देखा

क्या सोचती हो सोचकर देखा
क्या बोलती हो बोलकर देखा

  नींद चुभी जब पलकों पर तो
बंद आँखों को खोलकर  देखा

   साँस उठी जब महकी महकी
   सिरहाने       टटोलकर  देखा  #गद्दार

Saturday, 2 January 2016

मुरली

जो छुते हो मुरली को तिश्ना लबों से
वो जानिब मुझे खींच लाते तुम्हारे ।  #गद्दार

पत्थर 3

  दौड़कर    चलता हूँ लांघ कर निकल जाऊँगा
 तबियत ऐसी नहीं मेरी देखूँगा फिसल जाऊँगा

  शाम ए उल्फ़त में रंग बदलते होंगे   फ़लक पे
  मै रात का मंजर हूँ    पत्थर  में बदल जाऊँगा #गद्दार