टूटी कश्तीयाँ साहिल पे उतार आए
खामोशीयों को हमने ओढ़ लिया है
क्यूँ दरमियां शीशो की दीवार आए
याद तुम्हारी वादियो में गूंजती सदा
जो पुकारूँ एक बार तो बार बार आए
कमाल किया तेरी चाहतों के बिना
कुछ ऐसे जिए के जिंदगी गुजार आए #गद्दार
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मेरे अंदर का शोर गूंजता है और लाता है जिसे बाहर, उस से लिखता हूँ मै जो, उसे नाम नही देता शेर, ग़ज़ल, नज्म अशआर का वो तो होते है बस बिखरें पन्नें मेरे