टूटी कश्तीयाँ साहिल पे उतार आए
खामोशीयों को हमने ओढ़ लिया है
क्यूँ दरमियां शीशो की दीवार आए
याद तुम्हारी वादियो में गूंजती सदा
जो पुकारूँ एक बार तो बार बार आए
कमाल किया तेरी चाहतों के बिना
कुछ ऐसे जिए के जिंदगी गुजार आए #गद्दार
सोर्स गूगल इमेजेस
मेरे अंदर का शोर गूंजता है और लाता है जिसे बाहर, उस से लिखता हूँ मै जो, उसे नाम नही देता शेर, ग़ज़ल, नज्म अशआर का वो तो होते है बस बिखरें पन्नें मेरे
जला ही देंगे ये सुलगते से ख़्वाब मुझे
मिलते नहीं इन सवालो के जवाब मुझे
हर शाम दरिया पे ये नज़ारे होते है
डूबता मिले ख्वाहिशें आफ़ताब मुझे
तेरी मुआफ़ी मेरे लिये मानिंद ए सज़ा
क्यूँ दे दिये ये "गद्दार" से ख़िताब मुझे
जब भी तेरी यादों के पन्नें उलटता हूँ
क्यूँ मिलते नहीं सूखे हुए गुलाब मुझे
#गद्दार