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Tuesday, 6 December 2016

कश्ती

अगर कश्ती में हो तो
आइये बादबान संभालिए
अगर किनारे पे हो तो,
फिर देखिये तूफ़ां का मजा
#ग़द्दार

Monday, 20 June 2016

टूटी कश्ती गद्दार

दिल ऐसे जीते सब कुछ  हार  आए
टूटी कश्तीयाँ साहिल पे उतार आए

खामोशीयों को हमने ओढ़ लिया है
क्यूँ दरमियां शीशो  की दीवार आए

याद तुम्हारी  वादियो में गूंजती सदा
जो पुकारूँ एक बार तो बार बार आए

कमाल किया तेरी चाहतों के बिना
कुछ ऐसे जिए के जिंदगी गुजार आए #गद्दार

सोर्स गूगल इमेजेस 

Saturday, 18 June 2016

गुनाह राब्ता गद्दार

भुख लेकर आई जो हवस  निग़ाह में
इक गुनाह फिर लिक्खो मेरे गुनाह में

इंसाफ क्या मिलेगा तराजू में तौलकर
आ  गए जो  मुज़रिम   तेरे  गवाह में

सफ़र की थकन में हारा हुआ ये जिस्म
लौटकर ले    आयेगा  तेरी  पनाह  में

कितना हसीं राब्ता अश्क और आह का
मै उसके इम्तिहां में हूँ वो मेरे इम्तिहा में #गद्दार


सोर्स गूगल इमेजेस

Tuesday, 24 May 2016

दर्द की जंजीरे

देख कर इन हाथों में लकीर मेरी
फाड़ दो वो पास की तस्वीरें मेरी

शोर सी करती है यूँ खींच तान में
छटपटाने से दर्द  की  जंजीरें मेरी

होती नहीं है शक्लें हकीकत बारहा
ख़्वाब से जुदा होती है ताबीरें मेरी

आंधियां आह सी उठे या अश्क ए सुनामी
समन्दर तक शामिल है जागीरें मेरी 

#गद्दार

Thursday, 28 January 2016

वस्ल अंजाम गद्दार

वस्ल से  खार      खाये   बैठा हूँ
मै फ़ूल से तितली उड़ाये बैठा हूँ

मोहब्बतों में ये रास आया मुझको
गैरो  से  दिल    लगायें    बैठा  हूँ

शब् ए हिज्र गुजरना बाकी मुझ पर
    मै शाम से दिया जलायें बैठा हूँ

मुहब्बत में गद्दारियों के अंजाम देख लो
   अपनी ही तन्हाईयां लुटाये बैठा हूँ         #गद्दार