अगर कश्ती में हो तो
आइये बादबान संभालिए
अगर किनारे पे हो तो,
फिर देखिये तूफ़ां का मजा
#ग़द्दार
आइये बादबान संभालिए
अगर किनारे पे हो तो,
फिर देखिये तूफ़ां का मजा
#ग़द्दार
मेरे अंदर का शोर गूंजता है और लाता है जिसे बाहर, उस से लिखता हूँ मै जो, उसे नाम नही देता शेर, ग़ज़ल, नज्म अशआर का वो तो होते है बस बिखरें पन्नें मेरे
देख कर इन हाथों में लकीर मेरी
फाड़ दो वो पास की तस्वीरें मेरी
शोर सी करती है यूँ खींच तान में
छटपटाने से दर्द की जंजीरें मेरी
होती नहीं है शक्लें हकीकत बारहा
ख़्वाब से जुदा होती है ताबीरें मेरी
आंधियां आह सी उठे या अश्क ए सुनामी
समन्दर तक शामिल है जागीरें मेरी
#गद्दार
वस्ल से खार खाये बैठा हूँ
मै फ़ूल से तितली उड़ाये बैठा हूँ
मोहब्बतों में ये रास आया मुझको
गैरो से दिल लगायें बैठा हूँ
शब् ए हिज्र गुजरना बाकी मुझ पर
मै शाम से दिया जलायें बैठा हूँ
मुहब्बत में गद्दारियों के अंजाम देख लो
अपनी ही तन्हाईयां लुटाये बैठा हूँ #गद्दार