दिल में छुपा लो मगर खुशबुएँ ही दूँगा
मेरी फ़ितरत भी हुई कुछ गुलाब की तरह #gaddar
मेरे अंदर का शोर गूंजता है और लाता है जिसे बाहर, उस से लिखता हूँ मै जो, उसे नाम नही देता शेर, ग़ज़ल, नज्म अशआर का वो तो होते है बस बिखरें पन्नें मेरे
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Saturday, 28 November 2015
Wednesday, 14 October 2015
हल्के हल्के शरारे
इस कदर बात उठे दिल को दिवाना कर दे
गर्म सी धूप औ रातों को सुहाना कर दें
हल्के हल्के से शरारो सी वफा भी हो अगर
साथ में सर्द से झोंकों का ठिकाना कर दे
कुछ भी इजहार हो दिल से तो जुबां चुप सी हो
सारे लफ्ज़ों को मुहब्बत से रवाना कर दे
तुम चिरागों को हवाओं में इस कदर रखना
शमां ए नूर से रौशन ये जमाना कर दे ।
Saturday, 3 October 2015
जुल्फ़े तुम्हारी
सर्द रातों में जुल्फे तुमने जब सँवारी है
दिल के जज्बात में आतिशे ही उभारी है ।
सुर्ख गालों से मिली रंगत सारे फूलों को
पार दरिया के जैसे कश्ती सी उतारी है ।
रंग होठों का लगा शामिल मौसिमे गुल सा
शोख नजरो में लगी मैय की ही खुमारी है ।
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