भीगी सी जुल्फों को झटक कर पलटती हो
इक ख्याल कसीदे सा ग़ज़ल पन्नों को उलटती हो #gaddar
मेरे अंदर का शोर गूंजता है और लाता है जिसे बाहर, उस से लिखता हूँ मै जो, उसे नाम नही देता शेर, ग़ज़ल, नज्म अशआर का वो तो होते है बस बिखरें पन्नें मेरे
Friday, 27 November 2015
Tuesday, 24 November 2015
Wednesday, 14 October 2015
हल्के हल्के शरारे
इस कदर बात उठे दिल को दिवाना कर दे
गर्म सी धूप औ रातों को सुहाना कर दें
हल्के हल्के से शरारो सी वफा भी हो अगर
साथ में सर्द से झोंकों का ठिकाना कर दे
कुछ भी इजहार हो दिल से तो जुबां चुप सी हो
सारे लफ्ज़ों को मुहब्बत से रवाना कर दे
तुम चिरागों को हवाओं में इस कदर रखना
शमां ए नूर से रौशन ये जमाना कर दे ।
Tuesday, 14 July 2015
चाहत डायरियां गद्दार
चाहत में मोतियों सा बिखर के देखना
समेट ना पाओगी समेट के देखना
उलझ ही जायगी ये जुल्फ़े तुम्हारी
चाहो तो मुझ से लिपट के देखना
कंहा कंहा दर्ज है मुहब्बत हमारी
डायरियों के पन्नें उलट के देखना
हर नजर तुम्हारी घायल करती है हमें
चाहो तो बार बार पलट के देखना
#gaddar