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Saturday, 18 June 2016

गुनाह राब्ता गद्दार

भुख लेकर आई जो हवस  निग़ाह में
इक गुनाह फिर लिक्खो मेरे गुनाह में

इंसाफ क्या मिलेगा तराजू में तौलकर
आ  गए जो  मुज़रिम   तेरे  गवाह में

सफ़र की थकन में हारा हुआ ये जिस्म
लौटकर ले    आयेगा  तेरी  पनाह  में

कितना हसीं राब्ता अश्क और आह का
मै उसके इम्तिहां में हूँ वो मेरे इम्तिहा में #गद्दार


सोर्स गूगल इमेजेस

Saturday, 19 September 2015

वक़्त आसमान गद्दार

वक़्त भी अब क्या मेरा इम्तिहां लेगा
फुट कर रो देगा अगर जो जान लेगा

     कल का आया हुआ वो अजनबी
        क्या जगह हमारे दरमियां लेगा

तेरे अलावा एक ख्याल भी हो जेहन
दिल को छु कर के मेरा पहचान लेगा

पतंग ही तो लूटी थी फिज़ाओ ने तेरी
क्या लड़ कर खुदा से आसमान लेगा

#गद्दार