Showing posts with label ख्याल. Show all posts
Showing posts with label ख्याल. Show all posts

Sunday, 29 November 2015

ख्याल

हल्के हाथों से मिटा रहा है चादरों से ख्याल मेरा
           मिटा भी पायेगा ज़ेहन से वो  विसाल मेरा  #गद्दार

(विसाल -मिलन)

Friday, 27 November 2015

भीगी ज़ुल्फ़

भीगी सी जुल्फों को झटक कर पलटती हो
इक ख्याल कसीदे सा ग़ज़ल पन्नों को उलटती हो #gaddar

Sunday, 18 October 2015

खामोशियां जुर्म गद्दार

स्याही में अश्कों को घोलता रहा
मै खामोशियों कि जुबां में बोलता रहा

दरिया, मयख़ाने हर ठिकाने देखें
ज़ामें तिश्नगी में समंदर उड़ेलता रहा

चराग़ भी कंहा तक रौशनी बिखरें
     स्याह अंधेरो के मंज़र टटोलता रहा

मेरे हुनर को कहते है जुर्म "गद्दार"
में इक चाबी से हर ताले को खोलता रहा

#गद्दार

Saturday, 19 September 2015

वक़्त आसमान गद्दार

वक़्त भी अब क्या मेरा इम्तिहां लेगा
फुट कर रो देगा अगर जो जान लेगा

     कल का आया हुआ वो अजनबी
        क्या जगह हमारे दरमियां लेगा

तेरे अलावा एक ख्याल भी हो जेहन
दिल को छु कर के मेरा पहचान लेगा

पतंग ही तो लूटी थी फिज़ाओ ने तेरी
क्या लड़ कर खुदा से आसमान लेगा

#गद्दार