Saturday, 19 September 2015

वक़्त आसमान गद्दार

वक़्त भी अब क्या मेरा इम्तिहां लेगा
फुट कर रो देगा अगर जो जान लेगा

     कल का आया हुआ वो अजनबी
        क्या जगह हमारे दरमियां लेगा

तेरे अलावा एक ख्याल भी हो जेहन
दिल को छु कर के मेरा पहचान लेगा

पतंग ही तो लूटी थी फिज़ाओ ने तेरी
क्या लड़ कर खुदा से आसमान लेगा

#गद्दार

Friday, 11 September 2015

पत्थर गद्दार 2

दरिया कि ख़ामोशी को तोड़ने की जिद पर
           मेरे हाथ का हर  पत्थर गंवाया मैने

#गद्दार

पत्थर गद्दार 1

तेरा दर्द मेरे हाथों कि जद में ही है
खातिर उंगलियो को पत्थर से कुचल कर देखा

#गद्दार।

Thursday, 10 September 2015

एक पत्थर गद्दार

दरिया की ख़ामोशियों को तोड़ने कि एवज़ में
मेरे हाथ का पत्थर गवांना पड़ा मुझे        #गद्दार

Sunday, 30 August 2015

कुछ शेर गद्दार

इन पलकों कि निगेहबानी में
अश्क का बहना मुनासिब नहीं लगता

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लाख आजादी कि दलीलों पर
वो परिंदा रिहा होकर रिहा नहीं लगता

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अपनी शर्तों पर जीने कि ख्वाहिशें
   कर ही देती है अक्सर तन्हा मुझे

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वक़्त पर अपनी ही प्यास बुझाते
     कुछ घड़े खुद में रीते ही मिले

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#गद्दार

Friday, 14 August 2015

इशारें गद्दार

शाम दुपहर का एक किनारा लिए
डूबी उल्फत तिनके का सहारा लिए

दर्द है तो दर्द की नुमाईशे न कर
कश्ती डूबी है समंदर का किनारा लिए

झुलसे "गद्दार" सहरा की तपिश में
लिखता है वो अक्सर एक इशारा लिए

#gaddar



Saturday, 8 August 2015

इश्क हिज्र गद्दार

इश्क़ में दर्द की इंतेहा ना कर
जख्म भरते नहीं, उन्हें ताज़ा ना कर

सो ही जायगी फ़ुर्क़ते शब् में
फासलों में अब और परेशां ना कर @गद्दार

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हिज्र ए शब् गुजरना बाक़ी मुझ पर
में शाम से चराग़ जलाये बैठा हू...@गद्दार