Monday, 6 June 2016

गुलाब जलपरी गद्दार

    होंठो की रंगत देखता हूँ खुद को भुला कर
ज्यों गुलाब की दो पँखुड़ी रक्खी हो सजा कर

फूल  झरते  है   झिलमिल, झिलमिल  से  तेरे
हँसती हो जब  तुम मुझपे यूँ  खिल खिला कर

जलपरी तक भी पहुचेंगे  लिक्खे सब ख़त मेरे
दिये  थे  जो लहरों  को   साहिल  ने  बुला कर

इजहार ए मुहब्बत   पर  खामोशियों   से  वो
अब  भी   टाल  देगी  हर  सवाल मुस्कुरा  कर
#गद्दार

Sunday, 5 June 2016

जवानी शराब गद्दार

रक्खी थी यादों कि निशानी संभाल कर
फ़ेक दी वो   चिट्ठियां  सारी  उछाल कर 

रिश्ते  वो  इक सिरे से उलझा गये   सारे 
किरदार  इक नया  कहानी में डाल कर 

बहकने लगती सोलह सत्रह की उमर में 
रखती नही कदम   जवानी  संभाल  कर 

शराब जो  लिखते  हो  इस मर्ज की दवा 
पी  गया  घूंट  घूंट     पानी  में  डाल  कर #गद्दार



Tuesday, 24 May 2016

दर्द की जंजीरे

देख कर इन हाथों में लकीर मेरी
फाड़ दो वो पास की तस्वीरें मेरी

शोर सी करती है यूँ खींच तान में
छटपटाने से दर्द  की  जंजीरें मेरी

होती नहीं है शक्लें हकीकत बारहा
ख़्वाब से जुदा होती है ताबीरें मेरी

आंधियां आह सी उठे या अश्क ए सुनामी
समन्दर तक शामिल है जागीरें मेरी 

#गद्दार

Friday, 26 February 2016

फिर पत्थर

हिज्र  कि  शाम   पे   ढलना   मेरा
बाकी है अभी आग में जलना मेरा

जिस्म  तो कई रंग   से   रंगा   मैने
फ़क़त चेहरा कालिख से मलना मेरा

ख़्वाब  छुने  की जिद जो करे    वो
हाथ   पत्थर  से      कुचलना   मेरा

"गद्दार" फ़ितरत से बाज आओ वर्ना
मुमकिन नहीं दिल का बदलना मेरा  #गद्दार

Sunday, 7 February 2016

जानते हो तुम

                 झूठ कुछ मेरे थे कुछ सच तुम्हारे
           कुछ सच मेरे हो गये कुछ झूठ तुम्हारे

  तुम आगाज़ पे चुप थी, मै अंजाम में चुप था
      फिर ख़ामोश पत्थर के अंदाज में चुप था

     थोड़े दूर तक ही हम हमसफ़र बन चले थे
    और तेज़ क़दमो से चलने के मेरे फैसले थे

    तुम पीछे रह कर अब मुझे आवाज़े मत दो
   तुम जानती हो ना...................................
     .....मुझे लौट कर आना नहीं आता ........ गद्दार 

Friday, 5 February 2016

फिर इक दफ़ा

हर इक   जुर्म पे  मिलती  नहीं  सजा
फिर इक दफ़ा   तूने मुझे माफ़ किया

बेजुबां भी   हक़ में तेरे    बोलने  लगे
खामोशियों को मेरी मेरे ख़िलाफ़ किया #गद्दार

Thursday, 4 February 2016

साँवरी सी लड़की

ए  साँवरी  लड़की  
बंद  कर के मेरी आँखे
तू  शरारत  से  हँसे 
अनजान  बन  कर  
ना पहचाने जाने  का  तमाशा  में  करू
तेरे  अधरो  कि  मिट्टी प्यासी  है  अभी 
मै बादल  का  बहाना  कर  
तुझ  पर  बरसू.....
 मेरे  प्यार  के  आराइश  कि  सोंधी  सी  महक 
ना  जाये  चाहे  कितने  भी  
पहलु  बदलू 

– गद्दार